Avyaan

Saturday, March 31, 2018

हुनर - Akash mishra

सूरज पिघला के सोना करने का हुनर जानते हैं
सैलाबों को चीर समंदर को भरने का हुनर जानते हैं
जागते हुए सारी उम्र काटने का हुनर जानते हैं
मौत से क्या ज़िंदगी से भी डरने का हुनर जानते हैं
तुम्हारी इक हँसी को मुक्कमल करने की ख़ातिर
तुमपर सौ बार मरके फिर मरने का हुनर जानते हैं
-आकाश मिश्रा
Posted by akashmishra17 at 1:29 AM No comments:
Email ThisBlogThis!Share to XShare to FacebookShare to Pinterest

ऋण - आकाश मिश्रा

ऋण - आकाश मिश्रा
जीवन तेरा ऋण है भारत, मैं सच्चा हिंदुस्तानी।।
नीले नभ में चमक रोशनी रंग है आसमानी।
चाँदी सोना हीरे मोती पन्ना पत्थर धानी।।
हिम पर्वत सा मस्तक, चरण समुद्र का पानी।
पूजें इशा नानक अल्लाह, राम रूद्र शिवानी।।
ह्रदय विशाल पंजाब हिमाचल और पगड़ी राजस्थानी।
दोहे कबीर रसखान तुलसी के, गीत गाये मीरा दीवानी।।
रोशन जिसकी सुबह सुनहरी, शाम बड़ी सुहानी।
मनमोहक सी लोरी माँ की और दादी की कहानी।।
जीवन तेरा ऋण है भारत, मैं सच्चा हिंदुस्तानी।।
- आकाश मिश्रा
Posted by akashmishra17 at 1:28 AM No comments:
Email ThisBlogThis!Share to XShare to FacebookShare to Pinterest

कहानी - आकाश मिश्रा

इस बार कुछ पंक्तियाँ बाल मनुहारों के लिये:
कहानी - आकाश मिश्रा
आओ बच्चों तुम्हें सुनाऊँ आज मैं एक कहनी
शेर है जंगल का राजा और मछली जल की रानी
चंदा मामा टुक टुक देखें गायें प्यारे गीत
टिम टिम तारे चमके जैसे हो गयी उनकी जीत
सूरज चाचू चम चम चमके देखो हो गयी भोर
चीं चीं बोले सोन चिरैया गाना गाए मोर
ऊँची ऊँची चढ़ी गिलहरी खाने गयी आम
यहाँ वहाँ वो उचके कूदे सुबह से लेके शाम
छुक छुक करती रेल चली है ख़ूब मचाए शोर
चुक चुक दौड़ा चुन्नु चूहा दाँत से काटे डोर
टक टक जब तुम ऊपर देखो जहाँ वो नभ है नीला
झम झम करके पानी बरसे कर दे हम को गीला
आओ बच्चों तुम्हें सुनाऊँ आज मैं एक कहनी
शेर है जंगल का राजा और मछली जल की रानी
- आकाश मिश्रा
Posted by akashmishra17 at 1:27 AM No comments:
Email ThisBlogThis!Share to XShare to FacebookShare to Pinterest

शहादत - आकाश मिश्रा #poetakash #shaheed #shahadat #akash

हाल ही में जो आतंकी हमले सेना पर हुए और हमारे सैनिक शहीद हुए उसी से क्रोधित एक शहीद की बेवा द्वारा कहे शब्दों को आकाश मिश्रा की क़लम से कुछ पंक्तियाँ:
शहादत - आकाश मिश्रा #poetakash #shaheed #shahadat #akash
========•===•••=•••======•••=======
कल ही तुमसे मिलन हुआ था फिर आज कहाँ को खो गए तुम
कितनो को तुमने द्रवित किया और गहरी नींद मे सो गए तुम
रुद्र रूप धर तुमने कितने राक्षसो को हर डाला
कायर छिपे भेड़ियों ने जाने ये कैसे कर डाला
गीदड़ सारे मिले और एक सिंह से जा लिपटे
दहाड़ तुम्हारी सुन सोचे इन शेरो से कैसे निबटे
फिर वो छिपे रात में , हर इक कायर दूजे के साथ हुआ
जब सिंह हमारे सो रहे थे तब चुपके से उनपर घात किया
दिखा दिया की सोते शेर भी सौ कुत्तों से भारी होते हैं
मार गिराया उन सबको अब हम गहरी नींद में सोते हैं
तुमने कर्तव्य निभाया और दुश्मनो को दूर किया
ना छोड़ना भारत तुम उनको जिसने मेरा सिंदूर लिया
उस शासक की अब नींद खुले जो शांति का पाठ पढ़ाते हैं
ख़ुद तो कुछ कर नहीं सकते सेना का मज़ाक़ उड़ाते हैं
उनको भी औक़ात दिखा दो और ज़मीन पर ला धर दो तुम
ईमान तो पहले खोकर बैठे वो अब नाम तक उनका कर दो गुम
जीवन तो मेरा शून्य हुआ अब कैसे इसको मैं काटूँगी
ग़लती ख़ुद करके बतलाओ अब किसको मैं डाँटूगी
मृत्यु शैया को गले लगा के कितने जीवन जी गए तुम
काटा दिन को पहले और इसे अनंत रात से सी गए तुम
कल ही तुमसे मिलन हुआ था फिर आज कहाँ को खो गए तुम
कितनो को तुमने द्रवित किया और गहरी नींद मे सो गए तुम
-आकाश मिश्रा
Posted by akashmishra17 at 1:25 AM No comments:
Email ThisBlogThis!Share to XShare to FacebookShare to Pinterest

तुम मेरा जीवन - आकाश मिश्रा

फिर से कुछ लिखने का प्रयास
तुम मेरा जीवन - आकाश मिश्रा
=====================
जीवन के इस अँधियारे में तुम बन के उजाला आ जाना
तर्पण करने के कर्म कांड मे तुम इस शापित को तर जाना
मेरे ह्रदय की बंजर धरती पर तुम पुष्पों की हो बेल सुनो
मनमीत बनाने की ख़ातिर तुम दिल से दिल का मेल बुनो
मेरे दिल के ताम्र पत्र में बनकर स्याही तुम लिख जाना
देखूँ जब चाँद सितारों को बनकर माही तुम दिख जाना
ह्रदय नयनों से देख मुझे मैं ही वो अव्यान हुँ
तेरे जीवन के ह्रदय पटल का मान हुँ सम्मान हूँ
माना तुम ज्ञान कुंड की देवी हो इशानवी
मेरा अविरल ध्यान धरा, मैं बस अकिंचन एक कवि
द्रवित नयन में रस गुलाब का बनके बस तुम आ जाना
मेरे इस नीरस जीवन को पुष्प बाग़ सा महकाना
रूप तेरा अलौंकिक है और मैं बस सिफ़र एक प्रिये
ओ प्रियवर तू दूर ना होना तुझे पाने को कितने जतन किए
स्वप्न सुंदरी तू ही तो है दिल से दूर तू ना जाना
दूर अगर हो भी जाये तो वियोग गीत तू ना गाना
आँखो में तेरी छवि बसी है हम तो ऐसे जी लेंगे
दूरी सहन ना होगी तो क्या, कड़वा घूँट समझ के पी लेंगे
इक अँधियारी रात पड़ी है तू चमक चाँदनी छिटकाना
इस अँधियारे को छटने तुम बन दीपक माला छा जाना
-आकाश मिश्रा
Posted by akashmishra17 at 1:24 AM No comments:
Email ThisBlogThis!Share to XShare to FacebookShare to Pinterest

Friday, December 15, 2017

बचपन

छूटा वो बरगद वो बारिश का पानी
मुबारक हो तुमको ये तुम्हारी जवानी
छूटे वो कंचे वो बचपन के यार
वो गाँव वो धूप वो बचपन का प्यार


Posted by akashmishra17 at 5:01 AM No comments:
Email ThisBlogThis!Share to XShare to FacebookShare to Pinterest

वो मेरा देश - आकाश मिश्रा


=====================
वो मिट्टी के घर में लिपा हुआ गेरू और खटिया पर फटा चादर बिछा
यहाँ पक्के घर में रेशमी क़ालीन, बाहर हरा भरा गालिचा।।
वहाँ काली रात और आले मे रखा टिमटिमाता दिया
यहाँ चमचमाता शहर फिर भी क्यूँ जलता है जिया।।

वो मेरा क़स्बा वो मेरा देश
ना जाने कितनी भाषा
ना जाने कितने भेष ।।
सर के दर्द तक में पड़ोसियों का पूछना हाल
यहाँ यूँ तो हैं बड़े बड़े doctor और विशाल अस्पताल
फिर भी कराहता रह जाता हुँ मैं और दिल रहता है बेहाल ।।

वो होली वो दिवाली वो ईद वो बैसाखी
वो मामी वो ताई वो बुआ वो काकी ।।
वो रेवड़ी वो पेड़े वो तिल के लड्डू
वो दादा का कुर्ता वो दादी का नज़र बट्टू ।।

पापा की आँखो का वो सूनापन
माँ के दिल की वो अंजनी धड़कन ।।
वो निशब्द घर की चौखट पर खड़ी छोटी बहन
सोचकर रोता हुँ तड़पता हुँ फिर कर देता हुँ दहन।।
भाग जाऊँ आज ही तोड़कर ये सारे बंधन
छोड़कर ये सोने के महल ये झूटे आलंगन।।
गया तो था करने अपने सारे सपनो को पूरा
लौट रहा हूँ बनकर एक इंसान अधूरा।।
अब ना यहाँ को अपना पाया ना वहाँ को छोड़ पाया
ना इस देश से रिश्ता तोड़ पाया ना उस देश से जोड़ पाया।।

- आकाश मिश्रा
Posted by akashmishra17 at 4:52 AM No comments:
Email ThisBlogThis!Share to XShare to FacebookShare to Pinterest
Newer Posts Older Posts Home
Subscribe to: Posts (Atom)

Blog Archive

  • ▼  2020 (6)
    • ▼  November (2)
      • इश्क़ का इश्राक
      • इंसाँ
    • ►  July (1)
    • ►  April (2)
    • ►  March (1)
  • ►  2019 (2)
    • ►  September (2)
  • ►  2018 (17)
    • ►  December (2)
    • ►  August (4)
    • ►  June (2)
    • ►  May (1)
    • ►  March (8)
  • ►  2017 (2)
    • ►  December (2)
  • ►  2016 (2)
    • ►  January (2)

About Me

akashmishra17
View my complete profile
(c) Akash Mishra contact +91-9970016319. Picture Window theme. Powered by Blogger.