Tuesday, June 12, 2018

मज़हब - आकाश मिश्रा

मज़हब - आकाश मिश्रा
===================
क्यूँ ये रिश्तों के बीच दीवारें पाट दीं
क्यूँ ये मज़हब की डोर धर्म से काट दीं
क्यूँ ये रोज़े उपवास ईद और दीवाली बाँट दी
रोशन ही तो था वो अनवर सूरज का
क्यूँ ये अंधेरे की चादर आँखो में छाँट दी

- आकाश मिश्रा

=====================

Friday, June 1, 2018

द्रड़ निश्चय - आकाश मिश्रा

द्रड़ निश्चय - आकाश मिश्रा
================================
निकलो अब अंडे से कुछ तो करके दिखलाओ
कृष्ण नहीं बन सकते तो तुम अर्जुन ही बन जाओ
मार्ग वो दिखला देंगे तुम विश्वास तो यू ना खोओ
कर्म करो फिर फल कि सोचो यू बिन मतलब ना रोओ

ज़ोर लगा दो सपनो में की दिक मंडल मुड़ जायें
पंख लगा दो अरमानो में वो क्षितिज तक उड़ जायें
तोड़ दो उन बाधाओं को जो मस्तक में बैठा है
जोड़ लो श्रम का वो धागा जो जाने क्यूँ ऐंठा है

कब तक एक कुएँ में अपना जीवन यों झोंकोगे
कब तक आने वाले इन अवसर को यों रोकोगे
जगो उठो अब तो अपनी क्षमता को तुम पहचानो
छिपे हुए असफलता के डर को अपने तुम जानो

निर्णय तुमको लेना है ये जीवन की माला है
मत सोचो बच निकलोगे ये चिंतन की ज्वाला है
अब तो निश्चय कर लो द्रड़ अब तो तुम जी जाओ
कृष्ण नहीं बन सकते तो तुम अर्जुन ही बन जाओ
=============================
- आकाश मिश्रा
=============================

Friday, May 25, 2018

उड़ान - आकाश मिश्रा

उड़ान - आकाश मिश्रा
===================
उड़ान अभी बाक़ी है जहांन अभी बाक़ी है
ख़्वाब अभी बाक़ी है आसमान अभी बाक़ी है

ज़ंजीरे हैं अनगिनत, जकड़ ले जितनी है तेरी हस्ती
कर कोशिशें ले आ तूफ़ान, ना डूबेगी मेरी कश्ती

फ़ासले हैं सामने बहुत मगर छलाँग अभी बाक़ी है
उड़ान अभी बाक़ी है जहान अभी बाक़ी है


-आकाश मिश्रा

Saturday, March 31, 2018

रफ़ू - आकाश मिश्रा

रफ़ू - आकाश मिश्रा
===========================
ऐ रफूगर कर दे रफ़ू
रिश्तों में पड़ी दरार का
हमारी इक्षा बेशुमार का
देश में लड़ते हिंदू मुसलमान का
शिक्षा बाँटती विद्या की दुकान का
ऐ रफूगर कर दे रफ़ू
ग़रीबी पे हँसती ज़रूरत का
अन्याय के ख़िलाफ़ खड़ी मूक मूरत का
जवानी में घुलते नशे के ग़ुबार का
धर्म को बाँटते पर्व और त्योहार का
ऐ रफूगर कर दे रफ़ू
राजनीति में बहकते युवाओं का
पर्चियों में लिखी महँगी दवाओं का
भूक से मरते किसान की बेबसी का
दूसरों के दुखो पर बढ़ती हमारी ख़ुशी का
ऐ रफूगर कर दे रफ़ू
इंसानियत में बढ़ती मतलब की दीवार का
बँटवारे और क्रोध के बढ़ते हुए ज्वार का
ऐ रफूगर कर दे रफ़ू, जोड़ दे इन फटी चिंदियों को
बना एक इंसान जोड़ दे जुदा बुर्क़े पगड़ी और बिंदियो को।
- आकाश मिश्रा
====================================

ख़ुशबू - आकाश मिश्रा

ख़ुशबू - आकाश मिश्रा
==================
एक बूँद गिरा दे ख़ुशबू कि, महका दे मेरा मन
सूना था मेरा दिल, बंजर था ये जीवन
सोम्य तेरे उस छूने भर से चहक पड़ी तन्हाई
हाए रे अब कहीं मार ना डाले मुझे ये तेरी जुदाई
तारे तितली चिड़िया फूल लगने लगे हैं अच्छे
सारे मीठे प्यारे सपने लगने लगे हैं सच्चे
एक लफ़्ज़ तू रख होंटो पे जो बन जाए संगीत
बेढंगा ये कल्पित भी गाये नित नये सुरीले गीत
कथा कहानी उपवन घर का संगम हुआ जस पूरा
तुझ बिन प्रिये जीवन सार था अब तक बस अधूरा
राधा संग ज्यों नाचें कान्हा बन मोहित दीवाना
प्रेम का धागा पक्का है जो कब तक था अनजाना
-आकाश मिश्रा
=====================•••

मेरा जहाँ

लफ़्ज़ों के बस का नहीं जज़्बातों का ये खेल है
बेमाना सब है बस तेरी रूह से मेरी रूह का ये मेल है
भूल पाना एक पल के लिए भी तुझको मुमकिन कहाँ
तू ही तो है मेरी आरज़ू, मेरी ज़िंदगी और मेरा सारा जहाँ

हुनर - Akash mishra

सूरज पिघला के सोना करने का हुनर जानते हैं
सैलाबों को चीर समंदर को भरने का हुनर जानते हैं
जागते हुए सारी उम्र काटने का हुनर जानते हैं
मौत से क्या ज़िंदगी से भी डरने का हुनर जानते हैं
तुम्हारी इक हँसी को मुक्कमल करने की ख़ातिर
तुमपर सौ बार मरके फिर मरने का हुनर जानते हैं
-आकाश मिश्रा